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Banswada Me Ghumne ki Jagah | बांसवाड़ा में घूमने की जगह | Top 10 Best Places To Visit In Banswada In Hindi

Banswada In Hindi, दोस्तों इस Article में जानेंगे राजस्थान के Banswada District,  Banswada me Ghumne ki Jagah के बारे में, और साथ ही जानेंगे प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में और वहां तक कैसे पहुंचे और बांसवाड़ा में घूमने का उचित समय आदि के बारे में।

यह एक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर और रेगिस्तानी धरती पर बसा हुआ पर्यटन स्थल बांसवाड़ा है। आप यहां आ के यहां के लोकल कल्चर और स्थानीय मेले का भी आनंद ले सकते हैं। इसे “सौ द्वीपों का शहेर” कहा जाता हैं। क्योंकि बांसवाड़ा में ‘माही’ नदी पर बड़ी संख्या में खूबसूरत द्वीप है।

Banswara Tourism In Hindi, बांसवाड़ा राजस्थान का एक प्रमुख जिला है जो दक्षिणी भाग से गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा से लगता है। आपको बता दें कि इस जिले को राजस्थान का चेरापूंजी भी कहते हैं। मध्य प्रदेश से होकर आने वाली माही नदी यहां का प्रमुख आकर्षण है। यह नदी बासंवाडा जिले की जीवन वाहिनी है। इस जगह का अपना नाम बासंवाडा बांस के पेड़ों से मिलता है जो यहां कभी काफी संख्या में हुआ करते थे।

इन सब के अलावा बांसवाड़ा अपने विभिन्न पर्यटन स्थलों के लिए भी जाना जाता है। जिसकी वजह से यह देश भर के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। माही डैम के कारण बने टापुओं की वजह से इसे ‘‘सिटी ऑफ हण्ड्रेड आईलैण्ड्स’’ के नाम से  भीजाना जाता है। अगर आप बांसवाड़ा या इसके पर्यटन स्थलों की यात्रा करने के बारे में अन्य जानकारी चाहते हैं तो, इस लेख को जरुर पढ़ें। जिसमे हम आपको बांसवाड़ा के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में बताने जा रहें हैं –

Table of Contents

बांसवाड़ा का इतिहास – Banswara History In Hindi

बांसवाड़ा भारतीय राज्य राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित एक शहर है। यह गुजरात और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की सीमा के निकट है। बांसवाड़ा की स्‍थापना पाडू पुत्र भीम ने की थी बांसवाडा बास अधिक के कारण इसका नाम बांसवाड़ा पड़ा। इसे “सौ द्वीपों का नगर” भी कहते हैं क्योंकि यहाँ से होकर बहने वाली माही नदी में अनेकानेक से द्वीप हैं।

बांसवाड़ा के आसपास का क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में समतल और उपजाऊ है, माही बांसवाड़ा की प्रमुख नदी है मक्का, गेहूँ और चना बांसवाड़ा की प्रमुख फ़सलें हैं। बांसवाड़ा में लोह-अयस्क, सीसा, जस्ता, चांदी और मैंगनीज पाया जाता है। इस क्षेत्र का गठन 1530 में बांसवाड़ा रजवाड़े के रूप में किया गया था और बांसवाड़ा शहर इसकी राजधानी था। 1948 में राजस्थान राज्य में विलय होने से पहले यह मूल डूंगरपुर राज्य का एक भाग था।

बांसवाड़ा के पूर्व में प्रतिवेशी पहाड़ियों द्वारा बने एक गर्त में बाई तालाब नाम से ज्ञात एक कृत्रिम तालाब है जो महारावल जगमाल की रानी द्वारा निर्मित है। लगभग 1 किलोमीटर दूर रियासत के शासकों की छतरियां हैं। कस्बे में कुछ हिन्दू व जैन मन्दिर व एक पुरानी मस्जिद भी है। अब्दुल्ला पीर दरगाह निकटस्थ ग्राम भवानपुरा में स्थित है। इस स्थान पर प्रतिवर्ष बोहरा जाति के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। माही परियोजना बांध की नहरों में पानी वितरण के लिए शहर के पास निर्मित कागदी पिक-अप-वियर है जो सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केन्द्र है।

बांसवाड़ा में घूमने की जगह- Places to visit in Banswada

अगर आप बांसवाड़ा घूमने की योजना बना रहें हैं तो स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं। बांसवाड़ा कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों से भरा हुआ है जिनकी जानकारी हमने नीचे विस्तार से दी है।

  1. आनंद सागर लेक – Anand Sagar Lake
  2. अब्दुल्ला पीर दरगाह – Abdullah Pir Dargah
  3. अंदेश्वर पार्श्वनाथजी – Andeshwar Parshwanath
  4. रामकुण्ड – Ram Kund
  5. विठ्ठल देव मंदिर – Vitthal Dev Temple
  6. डायलाब झील – Dialab Lake
  7. कागदी पिक अप वियर – Kagdi Pick Up Weir
  8. माही डैम – Mahi Dam
  9. पराहेडा – Paraheda
  10. राज मंदिर – Raj Mandir
  11. तलवाड़ा मंदिर – Talwara Temple
  12. त्रिपुरा सुंदरी मंदिर – Tripura Sundari
  13. मदारेश्वर मंदिर – Madareshwar Temple
  14. कल्पवृक्ष – Kalpa Virksha
  15. सवाईमाता मंदिर – Samai Mata Mandir
  16. मानगढ़ धाम – Mangarh Dham
  17. छींछ मंदिर – Cheech Temple
  18. सिंगपुरा – Singpura
  19. जुआ झरने – Jua Falls

बांसवाड़ा में घूमने की जगह- Banswada me Ghumne ki jagah

1. आनंद सागर लेक – Anand Sagar Lake

झील जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और बसों और टैक्सियों द्वारा यहाँ पहुंचा जा सकता है।

आनंद सागर झील बांसवाड़ा के पूर्वी हिस्से में स्थित एक सुंदर कृत्रिम झील है। यह कहा जाता है कि यह झील इदर की लच्छी बाई जो कि महारावल जगमाल की पत्नी थी, ने बनवाई थी। राज्य के भूतपूर्व शासकों की छतरियां या स्मारक झील के पास स्थित हैं। पवित्र पेड़ जिसे ‘कल्प वृक्ष’ के नाम से जाना जाता है और ऐसा माना जाता है कि यह आगंतुकों की इच्छाओं को पूरा करता है यह भी इसी झील के पास में स्थित हैं।

झील के पास छोटे पहाड़ हैं जहां एक प्रसिद्ध राम कुंड है, जिसे ‘फटी खान’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस पहाड़ी के नीचे एक गहरी गुफा है। साल भर यहाँ  पानी बहुत ठंडा रहता है। कहा जाता है कि भगवान राम  अपने वनवास के दौरान यहाँ आए थे और यहां रहे थे। यह पहाड़ियों से घिरी हुई एक सुंदर जगह है।

2. अब्दुल्ला पीर दरगाह – Abdullah Pir Dargah

अब्दुल्ला पीर अब्दुल रसूल की दरगाह है जो कि शहर के दक्षिणी भाग में स्थित है। यहाँ “उर्स” जनता द्वारा हर साल उल्लास के साथ मनाया जाता है। बोहरा समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं। यह समाधि जिला मुख्यालय से 3 किमी की दूरी पर स्थित है और सड़क मार्ग से यहाँ तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

बोहरा मुसलमानों के लिए पूजा स्थल, बांसवाड़ा में अब्दुल्ला पीर दरगाह का ऐतिहासिक महत्व है। इसके अलावा, अब्दुल रसूल की दरगाह के रूप में जाना जाता है, यह मंदिर बांसवाड़ा का एक महत्वपूर्ण स्थल है और शहर के दक्षिणी भाग में स्थित है।

अब्दुल्ला पीर दरगाह को अब्दुल रसूल की दरगाह भी कहा जाता है, अब्दुल्ला पीर दरगाह बंसवारा शहर का सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह सभी बोहरा मुस्लिम संतों के और अपने एक खास ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह दरगाह शहर के दक्षिणी भाग में स्थित है। हर साल, खासकर बोहरा समुदाय के लोग बड़ी संख्या में, दरगाह के ‘उर्स’ में हिस्सा लेते है। यह त्यौहार 6 दिनों तक चलता है और यहाँ रात भर कव्वाली गायन के संगीत कार्यक्रम होते हैं। इस दौरान देशभर से हजारों तीर्थयात्री बांसवाड़ा की यात्रा करते हैं।

मुख्य दरगाह सुंदर बागो के बीच स्थित है और यह सफेद संगमरमर से बनाया गया जिसके चार द्वार हैं। शहर से केवल 3 किमी दूर स्थित होने से पर्यटक और भक्त यहाँ आसानी टैक्सी या टेम्पो से पहुंच सकते हैं।

3. अंदेश्वर पार्श्वनाथजी – Andeshwar Parshwanath

श्री अंदेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर राजस्थान में स्थित है , और बांसवाड़ा से 40 किमी दूर स्थित है । तीर्थ एक पर स्थित है पहाड़ी Andeshwar, में Kushalgarh तहसील बांसवाड़ा जिले के। निकटतम रेलवे स्टेशनों से यह स्थान उदयगढ़ से 50 किमी दूर है; दाहोद के उत्तर में 50 किमी ; कुशलगढ़ से 15 किमी पश्चिम और कलिनजारा से 8 किमी पूर्व में। तीर्थ कुशलगढ़-कालिंजारा रोड पर है।

मंदिर का मुख्य आकर्षण मूलनायक पार्श्वनाथ की मूर्ति है, जो 12वीं या 13वीं शताब्दी की मानी जाती है। भगवान पार्श्वनाथ की काली मूर्ति सात फनों वाली लगभग ८० सेंटीमीटर लंबी है। ऐसा माना जाता है कि इसकी खोज उस क्षेत्र की जनजातियों ने खेत में खेती करते समय की थी। हर साल कार्तिक पूर्णिमा यानी हिंदी महीने कार्तिक के पंद्रहवें चंद्र दिवस पर एक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के कस्बों और गांवों के लोग आते हैं।

मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था। इसे हाल ही में पुनर्निर्मित किया गया था। सफेद रंग के मार्बल से बना मानस्तंभ वाकई में आकर्षक है। पार्श्वनाथ को समर्पित एक कांच मंदिर भी हाल ही में मुख्य मंदिर के पास बनाया गया था।

4. रामकुण्ड – Ram Kund

श्री राम कुंड के दर्शन करने के लिए आप बांसवाडा – गढ़ी मार्ग पर तलवाड़ा से होते हुवे सामागढ़ा की और जाने वाले मार्ग पर भीम कुंड से 4-5 किलोमीटर एक कच्चा मार्ग से आप इस पवित्र स्थान पहुँच सकते हो और दूसरा एक अन्य मार्ग तलवारा से त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर जाने के दौरान बीच मे दाहिने तरफ एक कच्चा मार्ग है. यह मार्ग लगभग 3 किलोमीटर का है. यह मार्ग आपको राम कुण्ड तक पहुंचता है, जो की छोटा रास्ता है.

श्री राम कुंड चारो और से पाहाड़ो से घिरी गुफा में है । यहाँ भगवान श्री राम अपने 14 साल के  बनवास के दुरान माँ सीता श्री राम और लक्ष्मण  कुछ समय के लिए रुके थे  यहाँ जो कुंड है उसमे जो पानी है  अगर उसमे आप हाथ डालोगे तो ऐसा लगेगा जैसे आप का हाथ बर्फ में हो । इतना ठंडा जल है यहाँ का किसी भी वक्त  आप चले जाओ आपको जल ठंडा बहुत ठंडा मिलेगा

अंग्रेजो के खिलाफ 1857 की क्रांती के दोरान तात्या टोपे इसी श्री राम कुंड पर रुके थे और  यही से 1857 की क्रांती की योजना को अंजाम दिया गया था।  

यहाँ पर शिव लिंग की स्थापना करी हुई है। और एक बहुत ही गहरा पानी का कुंड है। कुंड मे चमगादड़ है इसलिए सुरक्षा का ध्यान रखे।

राम कुंड को ‘फटी खान’ भी कहा जाता है क्योंकि यह एक पहाड़ी के नीचे एक गहरी गुफा के रूप में है। चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है, यह जगह प्रकृति के प्रेमियों के लिए एक उपचार है। ठंडे पानी का एक पूल पास ही में स्थित है यह एक अनोखा पूल है क्योंकि यह कभी सूखता नहीं है। लोगों का मानना है कि भगवान राम ने अपने बनवास के दौरान, इस जगह पर कुछ समय बिताया था, इसलिए इसका नाम राम कुंड पड़ा।

5. विठ्ठल देव मंदिर – Vitthal Dev Temple

विठ्ठल देव मंदिर बांसवाड़ा से कुछ किलोमीटर दूर पर स्थित है जो एक सुंदर लाल मंदिर है जो भगवान के भक्तों को अपनी तरफ बेहद आकर्षित करता है। यह मंदिर कृष्ण को समर्पित है। अगर आप बांसवाड़ा की यात्रा करने जा रहें हैं तो आपको इस मंदिर को अपनी लिस्ट में जरुर शामिल करना चाहिए।

6. डायलाब झील – Dialab Lake

बांसवाडा में स्थित डेलाब झील एक खूबसूरत झील है जो पूरे वर्ष कमल के फूलों से ढंकी रहती है। यह प्रकृति में कुछ समय बिताने और आनंद लेने के लिए स्थानीय लोगों की यह एक प्रसिद्ध जगह है। झील के किनारे बादल महल नामक एक महल है। यह महल पूर्वी शासकों के गर्मियों का रिसॉर्ट हुआ करता था और अब यह बांसवाड़ा का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।

दिआब्लाब झील जिला मुख्यालय से 1 किमी की दूरी पर स्थित है और एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण है,इसकी नैसर्गिक सुंदरता के लिए धन्यवाद। यह झील आंशिक रूप से सुंदर कमल के फूलों से ढकी हुई है जो झील के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। पूर्व शासकों का ग्रीष्मकालीन निवास, बादल महल कहलाता है, जो झील के किनारों पर बना है। लोग गर्मी के मौसम में झील पर नौका विहार का आनंद ले सकते हैं।

7. कागदी पिक अप वियर – Kagdi Pick Up Weir

कागदी पिक अप वियर रतलाम रोड पर स्थित शहर से 3 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। आपको बता दें कि यहां स्थित आकर्षक फव्वारों, बगीचों और जल निकायों को देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां की यात्रा पर्यटक अपने बच्चों के साथ भी कर सकते हैं, क्योंकि यहाँ पर बच्चों के लिए पार्क, झूले और बोटिंग की सुविधा भी है। अगर आप अपने परिवार या बच्चों के साथ बांसवाड़ा जिले की यात्रा कर रहें हैं तो आपको कागदी पिक अप वियर की सैर जरुर करना चाहिए।

कागड़ी पिक अप मेड़, जो कि बाँसवाड़ा के जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर रतलाम रोड पर स्थित है, एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। सुंदर उद्यान, फव्वारे और पानी का एक बड़े क्षेत्र में फैलाव, ये सब मिलकर इसे पर्यटकों के लिए एक ‘हॉटस्पॉट’ बनाते है।

8. माही डैम – Mahi Dam

बांसवाड़ा में माही बांध, माही बजाज सागर परियोजना के एक भाग के रूप में निर्मित किया गया था। चूँकि माही बांध के जलग्रहण क्षेत्र के अंदर द्वीपों की एक बड़ी संख्या हैं, इसलिए बांसवाड़ा “सौ द्वीपों का शहर” के नाम से भी लोकप्रिय है। यह बांध बांसवाड़ा जिले से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सड़क मार्ग से इस तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।  

आपको बता दें कि इस डैम में 6 गेट हैं और यह 3.10 किमी लंबा है। यह डैम बांसवाड़ा पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। माही बजाज सागर परियोजना के तहत माही नदी पर कई बांध और नहरें बनाई गई हैं। जब यह डैम पूरी तरह से भर जाता है और इसके गेट खोले जाते हैं तो यह दृश्य बहुत ही अदभुद होता है।

अगर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ माही डैम घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो हम आपको बता दे वैसे तो आप ग्रीष्मकाल को छोड़कर साल के किसी भी समय माही डैम की यात्रा का सकते है लेकिन मानसून का समय यहाँ की यात्रा के लिए सबसे अच्छा और रोमांचक समय होता है। क्योंकि मानसून के मौसम में जब बंद गेटो को खोला जाता हैं तो एकाएक यहां से निकलने वाले पानी की प्रचंडता और कोलाहल मचाती हुई आवाज दूर से सुनी जा सकती हैं और जहाँ आप पानी का एक मनोहर दृश्य देख सकते है।

9. पराहेडा – Paraheda

बांसवाडा , राजस्थान मे स्थित प्राचीन पराहेडा शिव मंदिर का निर्माण गुर्जर प्रतिहार राजाओ ने करवाया था। मंदिर गुर्जर प्रतिहार शैली मे निर्मित है तथा एक विशाल क्षेत्र में फैला है पराहेडा शिव मंदिर के चारों ओर कई छोटे-छोटे शिव मंदिर और रैगिंग धर्मशालाएं हैं।

पराहेडा शिव मंदिर निकट ही स्थित है परतापुर शहर में गढ़ी की तहसील बांसवाड़ा। से 25 किमी दूर है बांसवाड़ा जिला भारतीय राज्य का राजस्थान Rajasthan। मंदिर अपनी पुरानी और बारीक मूर्तियों के लिए जाना जाता है।

10. राज मंदिर – Raj Mandir

राज मंदिर वास्तुकला की पुरानी राजपूत शैली का एक अच्छा उदाहरण है। मंदिर को सिटी पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर को 16वीं शताब्दी में पहाड़ पर बनाया गया था। पहाड़ी की चोटी से मंदिर के पास पूरा शहर दिखाई देता है। आज यह मंदिर भी शाही परिवार का है। वास्तुकारों के लिए यह महल बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप वास्तुकला में रुचि रखते हैं तो आपको बांसवाड़ा के इस मंदिर की यात्रा करनी चाहिए।

11. तलवाड़ा मंदिर – Talwara Temple

तलवाड़ा मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहाँ एक सिद्धि विनायक मंदिर है जिसे अमलिया गणेश के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के साथ ही सूर्य मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, सांभरनाथ का जैन मंदिर, भगवान अमलिया गणेश, महा लक्ष्मी मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर प्रसिद्ध हैं। यदि आप बांसवाड़ा की यात्रा के दौरान किसी आध्यात्मिक स्थान की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको तलवार की यात्रा करनी चाहिए।

12. त्रिपुरा सुंदरी मंदिर – Tripura Sundari

राजस्थान के बांसवाड़ा से करीब 14 किलोमीटर दूर तलवारा गांव से करीब 5 किलोमीटर की ऊंचाई पर घने कठफोड़वा में उमराई के छोटे से गांव माताबारी में मां त्रिपुरा सुंदरी की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि पहले मंदिर के चारों ओर तीन मीनारें थीं। इन तीन स्थिरांक शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी की खोज के परिणामस्वरूप, देवी का नाम त्रिपुर सुंदरी रखा गया।

इस मंदिर को “माता तीरटिया” के नाम से भी जाना जाता है। और यह मंदिर त्रिपुरा सुंदरी देवी को समर्पित है। यहां माता की भव्य अद्भुत मूर्ति है। जिसके दर्शन के लिए लोग दूर दूर से आते है।

13. मदारेश्वर मंदिर – Madareshwar Temple

बांसवाड़ा शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित मददारेश्वर महादेव मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां कई पर्यटक आते हैं। आपको बता दें कि यह मंदिर एक गुफा मंदिर है। इस मंदिर की प्रकृति कई आगंतुकों को आकर्षित करती है। शिवरात्रि के दौरान यहां एक प्रमुख क्षेत्रीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।

14. कल्पवृक्ष – Kalpa Virksha

कल्पवृक्ष रतलाम रोड पर स्थित एक शानदार वृक्ष है, जिसे समुद्र के चौदहवीं शताब्दी के विस्फोटों में से एक माना जाता है। पीपल और बरगद के समान यह विशाल वृक्ष मनुष्य की मनोकामना पूर्ण करता है। यह एक असामान्य पेड़ है जिसका धार्मिक महत्व है। आपको बता दें कि यहां कल्पवृक्ष नर और मादा दो रूपों में पाया जाता है। जिन्हें राजा-रानी के नाम से जाना जाता है। दोनों में से नर का तना छोटा और रानी का मोटा तना होता है।

15. सवाईमाता मंदिर – Samai Mata Mandir

सवाई माता मंदिर बांसवाड़ा से 3 किमी की दूरी पर स्थित है जहां 400 सीढ़ियां आपको सवाई माता मंदिर तक ले जाती हैं। यहां बंडारिया का मंदिर पहाड़ी की तलहटी में स्थित है, जो हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां की प्रकृति प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है। यहां आने के बाद सैलानियों को एक अच्छा अहसास होता है। नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में स्वयंसेवक आते हैं।

यहां पहाड़ से शहर का नजारा बेहद खूबसूरत है। अगर आप नवरात्रि के दौरान शहर घूमने जा रहे हैं तो आपको माता के इस मंदिर के दर्शन करने चाहिए। लेकिन आपको बता दें कि नवरात्रि के दौरान आपको यहां काफी भीड़ देखने को मिल सकती है।

16. मानगढ़ धाम – Mangarh Dham

मानगढ़ राजस्थान में बांसवाड़ा जिले का एक पहाड़ी क्षेत्र है। यहां मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमाएं भी लगती हैं। यहाँ पर महान संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में 1500 भीलों ने अपना बलिदान दिया था। यह बलिदान आजादी के आंदोलन में अब तक ख्यातनाम जलियांवाला बाग के बलिदान से भी बड़ा था और उससे भी पहले हो चुका था।

मानगढ़ धाम बांसवाड़ा जिले में आनन्दपुरी से कुछ दूरी पर बना हुआ है। यह ऐसा स्मारक है जो गुरुभक्ति और देशभक्ति को एक साथ दर्शाता है। करीब सौ साल पहले 17 नवंबर, 1913, मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गुरु का जन्मदिन मनाने के लिए एकत्र हुए हजारों गुरुभक्तों को ब्रिटिश सेना ने मौत के घाट उतार दिया था।

मानगढ़ धाम को राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा जाता है। यह बांसवाड़ा से 85 किमी दूर स्थित है। आपको बता दें कि इस जगह के बारे में कहा जाता है कि 17 नवंबर, 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में मानगढ़ की पहाड़ी पर एक रैली के दौरान लोगों ने ब्रिटेन से आजादी की मांग की थी, जबकि अंग्रेजों ने 1,500 देशभक्त राष्ट्रों पर गोलियां चला दी थीं। उसने उसे मार डाला।

प्रदर्शनी का आयोजन हर साल मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दौरान किया जाता है जिसमें राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के हजारों स्वयंसेवक भाग लेते हैं। इसे वर्तमान में शहीदों के लिए एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया जा रहा है। कोई भी पर्यटक जो बांसवाड़ा दर्शनीय स्थलों की यात्रा की योजना बना रहा है, उसे अपनी सूची में मानगढ़ धाम को शामिल करना चाहिए।

17. छींछ मंदिर – Cheech Temple

छींछ ब्रह्मा मंदिर 12वीं शताब्दी का एक मंदिर है जो राजा ब्रह्मा को समर्पित है। यहां रखी ब्रह्मा की मूर्ति एक काले पत्थर पर खुदी हुई है और इसकी ऊंचाई औसत आदमी की ऊंचाई के बराबर है। मंदिर क्षेत्रीय राजधानी से 18 किमी दूर स्थित है और यहां बस, टैक्सी और मंदिर द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

18. सिंगपुरा – Singpura

सिंगपुरा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से 10 किमी दूर एक छोटा सा शहर है। आपको बता दें कि यहां एक खूबसूरत झील है। चारों ओर की छोटी-छोटी पहाड़ियाँ, जंगल और हरियाली इस जगह को बेहद खास बनाते हैं। अगर आप अपनी बांसवाड़ा यात्रा के दौरान किसी प्राकृतिक स्थान की यात्रा करना चाहते हैं, तो आपको यहां की यात्रा करनी चाहिए। हालांकि सिंगापुर राजस्थान का एक छोटा सा शहर है, लेकिन यह आगंतुकों को आनंद लेने और शांति से रहने का अवसर प्रदान करता है।

19. जुआ झरने – Jua Falls

जुआ झरना राजस्थान में बांसवाड़ा का मुख्य आकर्षण है। यह क्षेत्र छिपे हुए रत्नों से समृद्ध है, जिनमें से कुछ अभी भी गायब हैं। बरसात के मौसम में झरने के झरने की यात्रा आगंतुकों के लिए एक बहुत ही खास अनुभव प्रदान कर सकती है। क्योंकि इस समय झरना बेहद खूबसूरत नजर आता है। अगर आप एक शांतिपूर्ण जगह की तलाश में हैं तो आपको यहां जरूर जाना चाहिए। यहां का व्यवस्थित वातावरण आपके दिल और दिमाग को मुक्त कर देगा।

बांसवाड़ा में रेस्तरां और स्थानीय भोजन – Restaurants And Local Food In Banswara

लवर आपको लोकप्रिय राजस्थानी व्यंजन और नाश्ते की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है। यहां शहर के रेस्टोरेंट के मेनू में पुरी, दाल बाटी चोइर्मा, रबड़ी, लस्सी, गट्टे की सब्जी जैसे व्यंजन शामिल होते हैं।

बांसवाड़ा घूमने जाने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Banswara Tourism

अगर आप राजस्थान के बांसवाड़ा जाने की योजना बना रहे हैं और यहां घूमने का सबसे अच्छा समय जानना चाहते हैं, तो यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के महीनों का है। बांसवाड़ा एक रेगिस्तानी इलाके में स्थित है, ज्यादातर लोग सर्दियों में यहां घूमना पसंद करते हैं। गर्मियों के दौरान यहां यात्रा करने की अनुशंसा नहीं की जाती है क्योंकि इस समय बहुत गर्मी होती है। क्योंकि इस मौसम में कम ही लोग यहां घूमना पसंद करते हैं। नवंबर से फरवरी तक यहां सर्दी का मौसम रहता है। तो आप इस समय बांसवाड़ा जा सकते हैं।

बांसवाड़ा कैसे जाये – How To Reach Banswara Tourism Rajasthan

बांसवाड़ा राजस्थान राज्य का एक प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है। अगर आप बांसवाड़ा जाने की योजना बना रहें हैं और यह जानना चाहते हैं कि हम बांसवाड़ा कैसे पहुँचें? तो आपको बता दें कि आप बांसवाड़ा परिवहन के विभिन्न साधनों द्वारा यात्रा कर सकते हैं। सड़क, ट्रेन और हवाई माधयम से बांसवाड़ा जाने की पूरी जानकारी हमने नीचे विस्तार से दी है।

हवाई जहाज द्वारा कैसे पहुंचे बांसवाड़ा – How To Reach Banswara By Air

हवाई जहाज द्वारा कैसे पहुंचे बांसवाड़ा

अगर आप हवाई जहाज द्वारा बांसवाड़ा जाने की योजना बना रहें हैं तो बता दें कि यहां का निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर में 160 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां हवाई अड्डा भारत के सभी प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु आदि से हवाई मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इस हवाई अड्डे से भारत के सभी शहरों के लिए नियमित उड़ाने मिल जाती हैं। हवाई अड्डे से आप बांसवाड़ा जाने के लिए बस या फिर किराये की टैक्सी ले सकते हैं।

ट्रेन से बांसवाड़ा कैसे पहुँचें – How To Reach Banswara By Train

ट्रेन से बांसवाड़ा कैसे पहुँचें

जो भी पर्यटक ट्रेन द्वारा बांसवाड़ा के लिए यात्रा करने की योजना बना रहें हैं उनके लिए बता दें कि यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन रतलाम रेलवे स्टेशन है जो लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित है। कई ऐसे ट्रेन है जो भारत के प्रमुख शहरों से इस स्टेशन के लिए मिल जाती हैं। यहां पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कई शहरों से ट्रेन आती हैं। रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद कोई भी पर्यटक बस या कैब की मदद से अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है।

सड़क मार्ग से बांसवाड़ा कैसे पहुंचें – How To Reach Banswara By Road

सड़क मार्ग से बांसवाड़ा कैसे पहुंचें

जो भी पर्यटक सड़क मार्ग द्वारा बांसवाड़ा जाने का विचार बना रहें हैं। उनको बता दें कि यहां तक पहुंचने के लिए सड़क द्वारा यात्रा करना काफी अच्छा है। यह शहर राजस्थान के प्रमुख शहरों  उदयपुर, जयपुर के अलावा दूसरे राज्यों से भी सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। राजस्थान के प्रमुख शहरों से और अन्य राज्यों के शहरों से यहां के लिए बसें भी उपलब्ध हैं। शहर में पर्यटक स्थलों की यात्रा करने के लिए पर्यटक किराए की टैक्सी ले सकते हैं।

इस आर्टिकल में आपने जाना है की बांसवाड़ा का इतिहास, राजस्थान के इतिहास से अलग कैसे है आपको हमारा यह आर्टिकल केसा लगा हमे कमेंट्स में जरूर बतायें।

इसी तरह की अन्य जानकारी हिन्दी में पढ़ने के लिए आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं।

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