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Ajmer Me Ghumne ki Jagah | अजमेर में घूमने की जगह | Top 10 Best Places To Visit In Ajmer In Hindi

Ajmer In Hindi, दोस्तों इस Article में जानेंगे राजस्थान के हृदय कहे जाने वाले Ajmer me Ghumne ki Jagah के बारे में, और साथ ही जानेंगे प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में और वहां तक कैसे पहुंचे और अजमेर में घूमने का उचित समय आदि के बारे में।

राजस्थान के खूबसूरत पर्यटक स्थलों में से एक है अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ शहर अजमेर। अजमेर शहर चारों ओर से एक विशाल झील आना सागर और अरावली पहाड़ियों से घिरा हुआ है जो अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटन का केंद्र बना हुआ है। अजमेर अपनी पवित्रता और धार्मिक स्थलों की वजह से काफी प्रसिद्ध है। अजमेर राजस्थान की राजधानी जयपुर से 130 किलोमीटर और नई दिल्ली से 400 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। आपको बता दे अजमेर दक्षिण-पश्चिम से 130 किमी और पुष्कर शहर से सिर्फ 14 किमी दूर स्थित है।

Table of Contents

अजमेर का इतिहास – Ajmer History In Hindi

अजमेर राजस्थान प्रान्त के मध्य में स्थित एक महानगर व एतिहासिक शहर है। यह इसी नाम के अजमेर संभाग व अजमेर जिला का मुख्यालय भी है। अजमेर अरावली पर्वत श्रेणी की तारागढ़ पहाड़ी की ढाल पर स्थित है। यह नगर सातवीं शताब्दी में अजयराज सिंह नामक एक चौहान राजा द्वारा बसाया गया था। इस नगर का मूल नाम ‘अजयमेरु’ था।

अजमेर को मूल रूप से अजयमेरु के नाम से जाना जाता था। इस शहर की स्थापना ११वीं सदी के चहमण राजा अजयदेव ने की थी। इतिहासकार दशरथ शर्मा ने नोट किया कि शहर के नाम का सबसे पहला उल्लेख पल्हा की पट्टावली में मिलता है, जिसे १११३ सीई (११७० वी.एस.) में धारा में कॉपी किया गया था। इससे पता चलता है कि अजमेर की स्थापना 1113 ई. से कुछ समय पहले हुई थी।विग्रहराज चतुर्थ द्वारा जारी एक प्रशस्ति (स्तुति संबंधी शिलालेख), और अढाई दिन का झोपड़ा में पाया गया, कहता है कि अजयदेव (अर्थात् अजयराज द्वितीय) ने अपना निवास अजमेर स्थानांतरित कर दिया।

अजमेर का एक समृद्ध इतिहास रहा है और 1616 में मुगल राजा जहाँगीर और इंग्लैंड के राजा जेम्स 1 के राजदूत, सर थॉमस रो के बीच पहली मुलाकात की मेजबानी की। शहर को आधिकारिक तौर पर कुछ शताब्दियों बाद ब्रिटिश को सौंप दिया गया था।

अजमेर में घूमने की जगह- Ajmer me Ghumne ki jagah

  1. अजमेर शरीफ की मजार
  2. तारागढ़ फोर्ट
  3. अढ़ाई दिन का झोपड़ा
  4. किशनगढ़ किला
  5. अकबरी मस्जिद अजमेर
  6. अकबर का महल और संग्रहालय
  7. फोर्ट मसूदा अजमेर
  8. सोनी जी की नसियां अजमेर
  9. नारेली जैन मंदिर अजमेर
  10. साईं बाबा मंदिर अजमेर
  11. फॉय सागर झील अजमेर
  12. पृथ्वीराज चौहान स्मारक अजमेर
  13. आनासागर झील अजमेर

अजमेर में घूमने की जगह- Ajmer me Ghumne ki jagah

1.अजमेर का तीर्थ स्थल ख्वाजा साहब की दरगाह- Ajmer ka Tirth sthal Kwaja Sahab ki Dargah

यह महान सूफी संत गरीब नवाज़ ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती जी की दरगाह है इस दरगाह में लोग अपनी मुरादें लेकर आते हैं इस्लाम धर्म ही नहीं बल्कि भारत के सभी धर्म के लोगों की आस्था इस दरगाह से जुडी हुई है सभी धर्म के लोग यहाँ आकर चादर चढ़ाते हैं यहाँ पर सबकी मुरादें पूरी होती है इसलिए सभी धर्मों के लोग यहाँ आते हैं यही कारण है कि इस दरगाह को तीर्थ स्थल कहा जाता है।

यहा आने वाले तीर्थ यात्रियों में एक अजीब तरह की आकर्षित सुगंध की लहर पूरे समय तक दौड़ती रहती हैं। जो पर्यटकों को आध्यात्मिकता के प्रति एक सहज और अपरिवर्तनीय आग्रह के साथ प्रेरित करती है। दरगाह शरीफ निस्संदेह राजस्थान का सबसे लोकप्रिय तीर्थस्थल है। यह एक महान सूफी संत ख्वाजा मोइन-उद-दीन चिश्ती का विश्राम स्थल है, जोकि एक महान सूफी संत थे, उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों और दलितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। क्योंकि यह स्थान सभी धर्मों के लोगों द्वारा बहुत पवित्र स्थान के रूप में जाना जाता हैं।

अजमेर शरीफ मुगलों द्वारा बनाया गया था। इसलिए इसमें मुगलों की वास्तुकला की अद्भुत झलक देखने को मिलती हैं। अजमेर शरीफ की मजार में विभिन्न घटक हैं जैसे कब्रें, आंगन और दावानल आदि। यहां की इन सभी संरचनाओं में से सबसे प्रमुख हैं- निजाम गेट, औलिया मस्जिद, दरगाह श्राइन, बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद, महफिलखाना और लगभग एक दर्जन अन्य प्रमुख प्रतिष्ठान भी हैं।

2. तारागढ़ फोर्ट -Taragarh Fort Ajmer

राजस्थान के अजमेर शहर में तारागढ़ की पहाड़ी पर हजरत मीर हुसैन सय्यद खिंग सवार रह0 की मजार है । यह मज़ार अजमेर की सबसे ऊंची जगह पर है, अजमेर शहर राजस्थान का ह्रदय है और तारागढ़ पहाड़ अजमेर का दिल है । गरीब नवाज की दरगाह से दक्षिण दिशा में आसमान से बातें करता ये पहाड़ जमीन से करीब 3 हजार फीट की ऊँचाई पर अरावली की चोटी पर स्थित है। इतिहासकार इसे अरावली का अरमान भी कहते है।

तारागढ़ नाम तो बहुत बाद में सन 1505 में रखा गया । चित्तौड़ के राजा राणा साँगा के भाई पृथ्वीसिंह सिसोदिया ने अपनी पत्नी ताराबाई के लिए यहां महल और किला बनवाया । इस रानी के नाम से इस पहाड़ का वर्तमान नाम मशहूर हुआ। अजमेर के पहले शासक अजय सिंह चौहान ने सन 1113 ईसवी में गढ़ बिठली’ नामक इस पहाड़ पर किला बनवाया जिसका नाम पहाड़ी के नाम से ‘गढ़ -बिठली’ रखा ।

बता दें कि इस किले को “स्टार फोर्ट” के नाम से भी जाना जाता है। यह किला अब खंडहर बन चुका है लेकिन आज भी यह भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। यह किला अपनी कई विशेषताओं की वजह से जाना जाता है और आज भी यह राजपूत शासन की भव्यता को प्रदर्शित करता है। अगर आप तारागढ़ किले के बारे में अन्य जानकारी चाहते हैं तो इस लेख को अवश्य पढ़ें, जिसमे- हम आपको तारागढ़ किला घूमने के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहें हैं।

तारागढ़ फोर्ट के खुलने और बंद होने का समय – Taragarh Kila Ajmer Timings In Hindi

  • ग्रीष्मकाल में किले की टाइमिंग – सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक
  • सर्दियों में में किले की टाइमिंग – सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक

तारागढ़ किला का प्रवेश शुल्क – Taragarh Fort Bundi Entry Fees In Hindi

  • भारतीयों के लिए-  25 रूपये प्रति व्यक्ति
  • विदेशियों के लिए-  100 रूपये प्रति व्यक्ति
  • इसके अलावा अगर आप अपने साथ डिजिटल कैमरा ले जाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक अलग टिकट खरीदना होगा, जिसकी लागत 50 रूपये है।
  • वीडियो कैमरा साथ ले जाने के लिए टिकट की कीमत 100 रूपये है।

3. अढ़ाई दिन का झोपड़ा – Adhai Din Ka Jhopara

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा  राजस्थान के अजमेर नगर में स्थित यह एक मस्जिद है। माना जाता है इसका निर्माण सिर्फ अढाई दिन में किया गया और इस कारण इसका नाम अढाई दिन का झोपड़ा पढ़ गया। इसका निर्माण पहले से वर्तमान संस्कृत विद्यालय को परिवर्तित करके मोहम्मद ग़ोरी के आदेश पर मोहम्मद गौरी के गवर्नर कुतुब-उद-दीन ऐबक ने वर्ष 1194 में करवाया था। यह एक पुरानी मस्जिद का अवशेष है जिसका निर्माण हिंदू और जैन मंदिरों के अवशेषों के साथ किया गया था। बता दें कि यहां के अधिकांश प्राचीन मंदिर आज खंडहर में हैं, लेकिन मस्जिद का क्षेत्र अभी भी धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया जाता है।

इस मस्जिद का नाम अढाई दिन का झोंपड़ा है जिसका अर्थ है ढाई दिन का शेड। मस्जिद के नाम से जुड़ी कई रोचक बाते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार, मनुष्य का जीवन पृथ्वी पर ढाई दिन का होता है। इतिहासकारों का कहना है कि प्राचीन काल में यहां पर ढाई दिन तक मेला लगता था।

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा के खुलने और बंद होने के समय – Adhai Din Ka Jhonpra Timings In Hindi

  • अधाई दिन का झोंपड़ा सुबहे 6 बजे से शाम के 6 बजे तक खूला रहता है।
  • अधाई दिन का झोंपड़ा को अन्दर से घूमने के लिए कोई प्रकार का प्रवेश शुल्क नही लिया जाता है।

4. किशनगढ़ किला – Kishangarh Fort

अजमेर से 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित किशनगढ़ किला राजस्थान के प्रमुख एतिहासिक पर्यटक स्थलों में से एक है। किशनगढ़ को भारत का संगमरमर शहर कहा भी जाता है, यह दुनिया का एकमात्र स्थान है जहां नौ ग्रहों का मंदिर है। अजमेर के पास स्थित किशनगढ़ किला के अंदर कई महल और स्मारक हैं जो एक विशाल खाई से घिरा हुआ है।

किले के पास एक शानदार झील भी स्थित है, जो कई दुर्लभ और विदेशी पक्षियों की मेजबानी करती है। राजस्थान का विशाल किशनगढ़ किला भव्यता का एक अनुपम प्रतीक है जो भारत आने वाले पर्यटकों को रोमांचित करने में कभी असफल नहीं होता है।

5. अकबरी मस्जिद अजमेर – Akbari Masjid Ajmer

शाहजहानी गेट और बुलंद दरवाजा के बीच में औरर कोटे रोड पर स्थित अजमेर के लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है। जो मुस्लिम समुदाय और इतिहास प्रेमी पर्यटकों के लिए अजमेर का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। जिसका निर्माण सम्राट अकबर द्वारा 1455 में किया गया था। यह उनके बेटे, प्रिंस सलीम या जहाँगीर के जन्म के समय आभार के रूप में बनाया गया था।

दरगाह शरीफ में बुलंद दरवाज़ा एवं शाहजहानी दरवाज़े के मध्य स्थित है। लाल बलुआ पत्थर से बनी यह मस्जिद अब मोईनुआ उस्मानिया दारुल-उलूम है जो कि अरबी एवं फारसी में धार्मिक शिक्षा के विद्यालय हैं।

इस मस्जिद के निर्माण में हरे एवं सफ़ेद संगमरमर का प्रयोग किया गया है। इस धार्मिक स्थल का निर्माण बादशाह अकबर ने तब करवाया था जब उनकी अपना उत्तराधिकारी पाने की दरगाह शरीफ में की गयी प्रार्थना पूरी हुई थी।

6. अकबर का महल और संग्रहालय – AKBAR PALACE AND MUSEUM AJMER

अजमेर के प्रसिद्ध स्थल अकबर का महल और संग्रहालय का निर्माण सन 1500 में उस जगह पर करबाया गया था जहां सम्राट अकबर के सैनिक अजमेर में रुके थे। 

इसका प्रयोग मुगल सम्राट जहाँगीर और मुगल दरबार के अंग्रेज राजदूत सर थॉमस रो, की बैठक की जगह के रूप में किया गया था। यह महल बादशाह एवं उनके सैनिकों के लिए निवास स्थान के रूप में प्रयुक्त होता था जब वे अजमेर में होते थे।

1908 में इसे संग्रहालय में बदल दिया गया, जिसमें छठी एवं सातवी शताब्दी एवं उसके बाद की कई हिन्दू मूर्तियाँ रखी हुई हैं। इन मूर्तियों की अधिकतर बनावट राजपूत और मुगल शैली के मिश्रण को दर्शाती है।

काले संगमरमर से बनी देवी काली की एक बड़ी प्रतिमा यहाँ का सबसे प्रसिद्ध आकर्षण है। प्राचीन सैन्य और युद्ध उपकरण, प्राचीन तोपखाने और हथियार, मूर्तियाँ और पत्थर की मूर्तियाँ भी इस संग्रहालय में देखी जा सकती है।

7. फोर्ट मसूदा अजमेर – Fort Masuda

मसूदा का किला अजमेर से 54 किमी दूर मसुदा में स्थित है। किला मूल रूप से 1595 ईस्वी के आसपास बनाया गया था, लेकिन यह तेजी से खराब हुआ और बहुत जल्द ही खंडहर में बदल गया। बाद में इसे नर सिंहजी मेर्टिया (1583-1623) द्वारा बहाल और पुनर्निर्मित किया गया था। शानदार किला अब लंबा खड़ा है और इसमें कांच महल, बड़ा महल, चंद्र महल आदि जैसे कई डिब्बे हैं।

अभी के लिए उत्तम मध्यकालीन में दीवारों पर लघु राजपूत चित्रों का संग्रह है और दुर्लभ पांडुलिपियों का एक पुस्तकालय भी है। चित्रों में फारसी प्रभाव भी है। परिधि के चारों ओर एक गोपालद्वारा मंदिर भी है। वर्तमान में किला शानदार अंदाज में खड़ा हुआ हैं जिसमे कांच-महल, बड़ा-महल, चंद्र-महल आदि और कई महल शामिल हैं। जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए है।

8. सोनी जी की नसियां अजमेर – Soniji Ki Nasiyan Ajmer

सोनी जी की नसियां अजमेर शहर में पृथ्वीराज मार्ग पर स्थित एक प्रसिद्ध जैन मंदिर है। जो सोनी जी की नसियां ​​के रूप में लोकप्रिय और राजस्थान में सबसे अच्छे जैन मंदिरों में से एक है। अजमेर का दर्शनीय स्थल सोनी जी की नसियां का नाम सिद्धकूट चैत्यालय है और इसे ‘लाल मंदिर’ के रूप में भी जाना जाता है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थकर को समर्पित हैं। सोनी जी की नसियां मंदिर का मुख्य आकर्षण मुख्य कक्ष है जिसे स्वर्ण नगरी या सोने की शहरी के नाम से भी जाना जाता हैं।

नासियान मंदिर की नींव 10 अक्टूबर 1864 को राय बहादुर सेठ मूलचंद और नेमीचंद सोनी द्वारा रखी गई थी। और इसे 26 मई 1865 को गर्भगृह में ‘अग्निदेव’ की छवि के साथ शिष्यों के लिए खोला गया था। जो जैन के 24 तीर्थंकरों में से प्रथम हैं। मंदिर का प्राचीन नाम सिद्धकूट चैत्यालय है। यह लाल रेत के पत्थर से बने इस मंदिर को लाल मंदिर ’के रूप में भी जाना जाता है। 1895 में स्वर्ण नगरी को मंदिर में जोड़े जाने के बाद, इसे लोकप्रिय रूप से सोने का मंदिर ’या  सोनी मंदिर’ कहा जाने लगा, जिसमें स्वर्ण संरचना के साथ-साथ परिवार का नाम भी शामिल था।

9. नारेली जैन मंदिर अजमेर – Nareli Jain Temple

ज्ञानोदय तीर्थ, नारेली जैन मंदिर, अजमेर के बाहरी इलाके में स्थित एक नवनिर्मित जैन मन्दिर है। शहर के केंद्र से 7 किलोमीटर की दूरी पर और जयपुर से 128 किलोमीटर पश्चिम की ओर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर स्थित है। संगमरमर के पत्थर से बना नारेली जैन मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला और जटिल पत्थर की नक्काशी के लिए पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है जो पारंपरिक और समकालीन दोनों रूप प्रस्तुत करता है। यह मंदिर पूरी तरह से पत्थर से बना है और चारों ओर सुंदर आकार के बगीचों से सुसज्जित है।

यह स्थानीय लोगो के अनुसार इच्छाओं को पूरा करने और जीवन में समृद्धि लाने के लिए जाना जाता है। मुख्य मंदिर में पहली मंजिल पर गुरु आदिनाथ जी की 22 फीट ऊंची विशाल मूर्ति है, जिसमें ऊपर की पहाड़ियों पर अन्य तीर्थंकर के 24 लघु मंदिर हैं। ऊपर से देखने में शानदार और लुभावनी है। इसका निर्माण अरावली पर्वतमाला में आरके मार्बल्स के श्री अशोक पाटनी द्वारा किया गया है। नारेली जैन मंदिर वास्तुकला और शहर क्षेत्र से दूर पहाड़ियों की प्राकृतिक सुंदरता के शौकीन पर्यटकों के लिए यह राजस्थान के सबसे लुभावने जैन मंदिरों में से एक है।

10. साईं बाबा मंदिर अजमेर – Sai Baba Temple Ajmer

अजमेर के अजय नगर में पांच बीगा या दो एकड़ से अधिक के क्षेत्र में फैले हुए प्रसिद्ध साईं बाबा मंदिर का निर्माण 1999 में गरीब नवाज शहर के निवासी सुरेश लाल के द्वारा किया गया था। जो अजमेर के लोकप्रिय तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है, और वास्तुकला के हिसाब से अजमेर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, जो सभी साईं भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय तीर्थ स्थल बना हुआ है। आपको बता दे की मंदिर को संगमरमर के शुद्धतम रूप के साथ बनाया गया है, जिसमें पारभासी पत्थर की अनूठी गुणवत्ता देखने को मिलती है। जो तीर्थ भक्तो के साथ-साथ पर्यटकों और कला प्रेमियों को अपनी और आकर्षित करता है, और जो अजमेर की यात्रा के लिए अजमेर के लोकप्रिय पवित्र स्थलों में से एक है।

11. फॉय सागर झील अजमेर – Foy Sagar Lake

फॉय सागर झील अजमेर शहर के पश्चिम में स्थित एक कृत्रिम मानव निर्मित झील है। 1892 ईस्वी में अंग्रेज वास्तुकार श्री फॉय द्वारा निर्मित इस झील का नाम उनके नाम पर रखा गया था। सूखे के दौरान अजमेर में पानी की कमी को दूर करने के लिए फॉय सागर झील बनायी गयी थी। पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत होने के कारण, यह बहुत सुंदर है यह अब एक प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट भी बन गया है।

झील में स्थापित शिलालेख से देखा जा सकता है। इसकी मूल क्षमता 15 मिलियन क्यूबिक फीट है, और पानी 14,000,000 वर्ग फीट (1,300,000 मी 2) में फैला हुआ है।

झील एक सपाट आकार की है जो देखने में एक पैनकेक की तरह लगती है। अब यह पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच समान रूप से एक पिकनिक स्थल की तरह व्यापक रूप से लोकप्रिय है।

अगर आप फाय सागर झील की यात्रा का प्लान बना रहे है तो हम आपको बता दे कि यहाँ फाय सागर झील में भारतीय और विदेशी किसी भी पर्यटकों के प्रवेश के लिए कोई भी शुल्क नही है। आप यहाँ बिना किसी शुल्क के फाय सागर झील घूम सकते है।

13. पृथ्वीराज चौहान स्मारक अजमेर – Prithviraj Chauhan Smarak Ajmer

जमेर में तारागढ़ रोड पर स्थित पृथ्वीराज चौहान स्मारक, चौहान वंश के महान नायक पृथ्वीराज चौहान का स्मारक है। जिसे साहस और देशभक्ति के प्रतीक माना जाने वाले महान योद्धा को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया गया था।  आपको बता दे स्मारक में राजा की मूर्ति को काले संगमरमर से तराशी गई है, जिसमे पृथ्वीराज चौहान एक घोड़े पर बैठे और अपने दुश्मन पर हथियार से निशाना बनाते हुए रूप में दर्शाये गये है। अरावली पहाड़ियों पर शानदार कदम-बगीचों के बीच बना ऐतिहासिक स्थल अजमेर शहर का एक अविश्वसनीय दृश्य प्रदान करता है। जो पर्यटकों और इतिहास प्रमियो घूमने के लिए अजमेर के सबसे आकर्षक स्थलों में से एक माना जाता है।

अरावली पहाड़ियों पर शानदार कदम-बगीचों के बीच बना ऐतिहासिक स्थल पृथ्वीराज स्मारक में राजा की मूर्ति को काले संगमरमर से तराशी गई है, जिसमे पृथ्वीराज चौहान एक घोड़े पर बैठे और अपने दुश्मन पर हथियार से निशाना बनाते हुए रूप में दर्शाये गये है।

पृथ्वी राज चौहान (मूल रूप से पृथ्वी राज तृतीय) चौहानों के वंश में अंतिम शासक था। जिन्होंने 12 वीं शताब्दी में दिल्ली और अजमेर की जुड़वां राजधानियों पर शासन किया था। पृथ्वी राज चौहान को 1192 में तराइन की दूसरी लड़ाई में हारने के बाद मोहम्मद गोरी की घुरिद सेना द्वारा मार दिया गया था और उन्हें वीर गति की प्राप्ति हुई थी। इसीलिए पृथ्वीराज चौहान को श्रद्धांजलि देने के लिए पृथ्वीराज चौहान स्मारक बनाया गया था जो एक युद्ध स्मारक के रूप में भी प्रसिद्ध है।

14. आनासागर झील अजमेर

आना सागर झीलआनासागर झील या आणा सागर झील भारत में राजस्थान राज्य के अजमेर संभाग में स्थित एक कृत्रिम झील है।

अजमेर राजस्थान के सबसे मनोरम स्थानों में से एक है जिसकी वजह से यहां भारी संख्या में पर्यटक यात्रा करते हैं। यह झील 11 वीं शताब्दी से शहर का एक प्रमुख आकर्षण रही है। बता दें कि इस आकर्षक झील की स्थापना अणाजी चौहान द्वारा 1135 और 1150 ईस्वी के बीच की गई थी। इस झील का निर्माण यहां के लोगों के बेहतर जीवन के लिए किया गया था। इस झील का निर्माण तब शुरू हुआ जब लूणी नदी के पार एक बांध बनाया गया था।

झील के पास कई मंडप बने हुए हैं जिन्हें बारादरी’ के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित ज्यादातर मंडप का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा वर्ष 1637 में किया गया था। यहां स्थित एक दौलत बाग गार्डन का निर्माण मुगल शासक जहाँगीर द्वारा किया गया था। बता दें कि यह गार्डन अपनी हरियाली और प्राकृतिक परिवेश के लिए प्रसिद्ध है। बता दें कि इस झील की शोभा और सुंदरता को बनाये रखने के लिए उच्च न्यायालय ने इसके जलग्रहण क्षेत्र में किसी भी अन्य निर्माण पर रोक लगा दी है।

अजमेर का मशहूर स्थानीय भोजन – Ajmer Famous Food

अजमेर शहर में खाने-पीने का लुत्फ उठाया जा सकता है। विभिन्न माउथवॉटर व्यंजनों के साथ-साथ विभिन्न व्यंजनों के कई पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका मिलता है। वेजी प्रेमी और मांसाहारी दोनों ही कुरकुरे कबाब से लेकर और भी कई तरह के नमूने लेने के लिए विभिन्न खाद्य पदार्थ प्राप्त कर सकते हैं। शहर के चारों ओर कई स्थानीय कैफे, रेस्तरां हैं जो शाही दृष्टिकोण के साथ मैत्रीपूर्ण माहौल में स्वादिष्ट भोजन परोसते हैं।

मटन, करी, लाल मास, चिकन बिरयानी कुछ ऐसे मांसाहारी खाद्य पदार्थ हैं जो हर व्यक्ति के स्वाद को बढ़ाएंगे। दाल बाटी चूरमा, लहसुन की चटनी, केर सांगरी, बाजरे की रोटी, मूंग दाल का हलवा, घेवर, रबड़ी कुछ बेहतरीन शाकाहारी व्यंजन हैं जिनका सेवन अजमेर में आपके प्रवास के दौरान किया जाना चाहिए। स्वादिष्ट राजस्थानी थाली के साथ इन स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद सभी खाने के शौकीनों को मंत्रमुग्ध कर देगा। अजमेर की गलियों और स्थानीय कैफे में नियमित व्यंजनों के अलावा चाट की वस्तुओं और स्ट्रीट फूड को भी आजमाना चाहिए। समोसा, कचौरी, कढ़ी-भुज्जे, चाट, भेल, पानीपुरी, पाव भाजी का मजा अजमेर की गलियों में लगेगा

मैंगो मसाला, मदीना रेस्तरां, हनीड्यू, शीश महल अजमेर शहर के आसपास कुछ अच्छे रेस्तरां हैं जो शानदार और रंगीन राजस्थानी थाली के साथ शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के खाद्य पदार्थों की पेशकश करते हैं।

अजमेर घूमने जाने का सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Ajmer

अजमेर घूमने जाने का सबसे अच्छा समय

वेसे तो आप इस स्थान पर साल भर घूम सकते हैं लेकिन अक्टूबर से मार्च का समय अजमेर घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। क्योंकि यह समय आपको शहर की यात्रा करने का एक आदर्श माहोल प्रदान करता है। मार्च से शुरू होने वाली ग्रीष्मकाल के दौरान अजमेर की यात्रा से बचें क्योंकि इस समय अजमेर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, जो आपकी अजमेर की यात्रा को हतोत्साहित कर सकता है।

अजमेर कैसे पंहुचा जाये – How To Reach Ajmer

अजमेर शहर राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जहा आप बस,ट्रेन या हवाई मार्ग से यात्रा करके पहुंच सकते है।

फ्लाइट से अजमेर कैसे पहुंचे – How To Reach Ajmer By Flight

फ्लाइट से अजमेर कैसे पहुंचे

अगर आप फ्लाइट से यात्रा करके अजमेर घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो हम आपको बता दे अजमेर शहर से लगभग 135 किलोमीटर दूरी जयपुर का सांगानेर हवाई अड्डा अजमेर का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा भारत के प्रमुख शहर दिल्ली और  मुंबई जैसे शहरों  से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ हैं। जब आप हवाई अड्डे पर पहुंच जाते हैं तो यहां से आप टैक्सी या बस से यात्रा करके अजमेर पहुच सकते हैं।

ट्रेन से अजमेर कैसे पहुंचे – How To Reach Ajmer By Train

ट्रेन से अजमेर कैसे पहुंचे

यदि आपने अजमेर जाने के लिए रेल मार्ग का चुनाव किया हैं, तो हम आपको बता दें कि अजमेर शहर का अपना प्रमुख रेलवे स्टेशन “अजमेर जंक्शन रेलवे स्टेशन” हैं। जोकि मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर और दिल्ली लाइन पर स्थित है। यह स्टेशन दिल्ली, मुंबई, जयपुर, इलाहाबाद, लखनऊ और कोलकाता जैसे भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ हैं। तो आप किसी भी प्रमुख शहर से ट्रेन से यात्रा करके अजमेर रेलवे स्टेशन पहुंच सकते है।

बस या सड़क मार्ग से अजमेर कैसे पहुंचे – How To Reach Ajmer By Bus

बस या सड़क मार्ग से अजमेर कैसे पहुंचे

यदि आपने अजमेर जाने के लिए बस या सड़क मार्ग  का चुनाव किया है तो हम आपको बता दें कि राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम के द्वारा दिल्ली, जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर जैसे आस-पास के शहरों से अजमेर को जोड़ने के लिए डीलक्स और सेमी-डीलक्स बसें नियमित रूप से चलाता है। तो आप बहुत ही आसानी से बस, टैक्सी या कार से यात्रा करके अजमेर पहुंच सकते है।

इस लेख में आपने अजमेर के टॉप 10 पर्यटक स्थलों (Best Tourist Places In Ajmer In Hindi) को जाना है आपको हमारा ये लेख केसा लगा हमे कमेंट्स में जरूर बतायें।

इसी तरह की अन्य जानकारी हिन्दी में पढ़ने के लिए आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं।

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